ram-navami
प्रकाशित कथा और उपलब्ध स्रोत संदर्भ।
स्रोत/प्रकाशन स्थिति को certification न समझें। कुलाचार और स्थानीय परंपरा परिवार/क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।
व्रत / पूजा कथा
अयोध्या के राजा दशरथ योग्य और प्रजावत्सल थे, पर संतान न होने से चिंतित रहते थे। गुरुजनों की सलाह से उन्होंने ऋष्यशृंग की अध्यक्षता में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ के अंत में दिव्य पायस प्राप्त हुआ, जिसे उनकी रानियों कौसल्या, कैकेयी और सुमित्रा में विधिपूर्वक बांटा गया।
समय आने पर चैत्र शुक्ल नवमी के शुभ मध्याह्न में कौसल्या ने राम को जन्म दिया। कैकेयी के पुत्र भरत और सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए। अयोध्या में आनंद, दान और मंगलाचार हुआ। चारों राजकुमारों का पालन शिक्षा, अनुशासन और सेवा के वातावरण में हुआ।
राम जन्म का उत्सव केवल राजकुमार के जन्म का स्मरण नहीं है। रामायण आगे चलकर यह प्रश्न उठाती है कि शक्ति का उपयोग कैसे हो, परिवार और राज्य के दायित्वों में संतुलन कैसे बने, और कठिन निर्णयों में सत्य तथा करुणा कैसे कायम रहें। पूजा में calculated मध्याह्न timing annual Panchang से लें और कथा को जाति, लिंग या समुदाय के विरुद्ध भेदभाव के समर्थन में न पढ़ें।
यह सामान्य धार्मिक मार्गदर्शिका है। परिवार, कुल और स्थानीय परंपरा में अंतर हो सकता है।
