jitiya
प्रकाशित कथा और उपलब्ध स्रोत संदर्भ।
स्रोत/प्रकाशन स्थिति को certification न समझें। कुलाचार और स्थानीय परंपरा परिवार/क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।
व्रत / पूजा कथा
जीमूतवाहन को ऐसे नायक के रूप में याद किया जाता है जो सत्ता और निजी सुविधा से अधिक करुणा को महत्त्व देता है।
कथा के प्रचलित रूप में गरुड़ के लिए बलि बनने वाले नाग की जगह जीमूतवाहन स्वयं को प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य निर्बल प्राणी की रक्षा है।
जीमूतवाहन के त्याग से करुणा जागती है और विनाशकारी क्रम रुकता है। विभिन्न क्षेत्रों में देवी, गरुड़, नाग और पुनर्जीवन के प्रसंग अलग तरह से सुनाए जाते हैं।
कथा मातृ-प्रेम और संतान-मंगल से जुड़ती है, पर स्वास्थ्य को खतरे में डालना इसका अनिवार्य अर्थ नहीं। करुणा पहले अपने शरीर और परिवार की सुरक्षा पर भी लागू होती है।
यह सामान्य धार्मिक मार्गदर्शिका है। परिवार, कुल और स्थानीय परंपरा में अंतर हो सकता है।
