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स्थान आधारित मिथिला पंचांग और पारंपरिक ज्योतिष साधन

DN Mithila Panchang
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holika-dahan

प्रकाशित कथा और उपलब्ध स्रोत संदर्भ।

स्रोत प्रकारDNPE Engine ritual dataset
स्थितिडेटा स्रोत
संदर्भ0 सार्वजनिक स्रोत

स्रोत/प्रकाशन स्थिति को certification न समझें। कुलाचार और स्थानीय परंपरा परिवार/क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।

कथा और महात्म्य

व्रत / पूजा कथा

हिरण्यकशिपु ने कठोर तप से शक्ति प्राप्त की और अपने राज्य में स्वयं को सर्वोच्च मानने लगा। उसका पुत्र प्रह्लाद बाल्यावस्था से ही विष्णु का स्मरण करता था। पिता ने समझाने, धमकाने और दंड देने के अनेक प्रयास किए, किंतु प्रह्लाद ने कहा कि परम सत्ता किसी एक अहंकारी शासक की संपत्ति नहीं; वह सभी में विद्यमान है।

प्रह्लाद को विष, सर्प, पर्वत और अन्य संकटों से हानि पहुंचाने की कथाएं प्रचलित हैं, पर उसकी श्रद्धा बनी रही। होलिका से जुड़ा अग्नि-प्रसंग बाद की व्यापक festival tradition में मिलता है: उसे अग्नि से सुरक्षा का वरदान होने की धारणा थी और वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी। किंतु निर्दोष प्रह्लाद बच गया और होलिका नष्ट हुई। इस भाग को पुराण के मूल प्रह्लाद चरित और बाद की होली परंपरा के बीच अंतर स्पष्ट करके प्रस्तुत करना चाहिए।

अंततः हिरण्यकशिपु ने क्रोध में पूछा कि क्या विष्णु स्तंभ में भी हैं। स्तंभ से नृसिंह रूप प्रकट हुआ—न पूर्ण मनुष्य, न पशु; न दिन, न रात; न भीतर, न बाहर—और अत्याचार का अंत हुआ। कथा का केंद्रीय संदेश यह है कि वरदान, शक्ति या नियमों की चालाक व्याख्या से नैतिक उत्तरदायित्व समाप्त नहीं होता।

होलिका दहन में पर्यावरण और अग्नि सुरक्षा आवश्यक है। प्लास्टिक, रबर, रसायन, रंगा हुआ कचरा या हानिकारक पदार्थ न जलाएं। स्थानीय प्रशासन के निर्देश, सुरक्षित दूरी और वयस्क निगरानी रखें। भद्रा और प्रदोष timing annual engine से लें; कथा को किसी व्यक्ति या समुदाय के विरुद्ध हिंसा के औचित्य के रूप में न पढ़ें।

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यह सामान्य धार्मिक मार्गदर्शिका है। परिवार, कुल और स्थानीय परंपरा में अंतर हो सकता है।